About Kocheta Pariwar
कोचेटा कुल का गौरवमयी - स्वर्णीम इतिहास"
इतिहास अपनी गति में अजीबो - गरीब तस्वीरे बनता / बिगाड़ता चलता है। जो तस्वीरे सतही होती है, वे तुरंत धुंदली होकर मिट जाती है। कुछ तस्वीरे गहरी होती है, वे न धुंदली होती है, न मिटती है। केवल संकल्प और समर्पण से ही इतिहास को पुनॆजीवित किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त दीर्घ कालांतर के पश्चात संवत ई. ११७१ में खतरगछ के प्रमुख आचार्य श्रीदादा जिनदत्त सुरीजी म. सा. (प्रथम दादा साहेब) ने भी असंख्य लोगो को जैन धर्मं के अनुसरण हेतु एवं राजपूतों को जैन धर्म के प्रति आस्थावान बनाया। आचार्य श्री दादा जिनदत्त सुरीजी म. सा. नेसोनगरा चौहनोंको, जो की शिल्प कला में माहिर थे,जैन धर्म में दीक्षित कर कोचेटा गौत्र से विभूषित किया। गत् १००० वर्षों के शिलालेख इस तथ्य के ज्वलंत प्रमाण है।
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